जबˈ गरीब बुढ़िया की मौत के बाद पढ़ी गई वसीयत तो गांववालो ने पकड़ लिया माथा नहीं हो रहा कानों पर यकीन- ‘आखिर ये कैसे हो गया?’

कहा जाता है कि किसी को भी देखकर उसकी हस्ती की थाह नहीं लगाई जा सकती है. हम किसी शख्स के बारे में उतना ही जानते हैं, जितना दो-चार मुलाकातों में उसे समझ पाते हैं. इसके अलावा वो कैसा है…








